
जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी डां उमाकान्तानन्द सरस्वती जी महाराज

संवाददाता: प्रभाकर मिश्र
कौशाम्बी। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के अग्रदूत जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी डां उमाकान्तानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज राष्ट्रपति भवन में देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उनके साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता राकेश भास्कर, पूर्व सांसद समीर राव, महेंद्र तिवारी, जितेन्द्र सिंह, डांक्टर दीपक समेत कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
मुलाकात के दौरान स्वामी उमाकान्तानन्द सरस्वती जी महाराज और राष्ट्रपति के बीच भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान, सनातन परंपरा के प्रचार-प्रसार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर गहन और सार्थक चर्चा हुई। स्वामी जी ने राष्ट्रपति को जूना अखाड़ा द्वारा धर्म, शिक्षा, सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वामी जी और संत समाज के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि संतों का मार्गदर्शन समाज को नैतिकता, सेवा और राष्ट्रहित की दिशा में प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति ही हमारी सबसे बड़ी पहचान है, और संत समाज का प्रयास समाज को एकसूत्र में बांधने का कार्य करता है।
इस दौरान भाजपा नेता राकेश भास्कर और अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी राष्ट्र निर्माण और समाज सुधार में संत समाज के सहयोग पर अपने विचार रखे। सभी ने मिलकर यह संकल्प लिया कि सनातन धर्म की मूल भावना – “वसुधैव कुटुम्बकम्” – को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा और देश को सांस्कृतिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने के लिए मिलकर कार्य किया जाएगा।
यह मुलाकात न केवल राज्य और संत समाज के मधुर संबंधों को और मजबूत करने का प्रतीक बनी, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म, राजनीति और समाज सभी मिलकर ही ‘नए भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।